महाभारत ! एक ऐसा टीवी सीरियल जिसने 80 के दशक में टीवी को एक नयी दिशा दी। रामायण के बाद भारत में सबसे श्रधा से देखा जाने वाला टीवी सीरियल। बीआर चोपडा कृत यह सीरियल आज तक लोगों के दिलो दिमाग पर छाया हुआ है। डॉ. रही मासूम रज़ा के बेहतरीन और सरल संवाद बच्चों से लेकर बड़ों की जुबां पर थे। महेंद्र कपूर का गाया शीर्षक गीत दशकों तक रविवार के दिन भारत के लाखों लोगों के घरों में गूंजा और आज भी लोगों को भाव विभोर कर देता है। राज कमल के संगीत ने इसको और अधिक रोचक बना दिया।
मूल रूप से वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत पर आधारित डॉ राही मासूम रज़ा द्वारा लिखित, निर्देशक बीआर चोपड़ा और रवि चोपड़ा के इस महान टीवी सीरियल ने ८० के दशक में जिस सफलता से 94 एपिसोड पूरे करते हुए सफलता की बुलंदियों को छुआ इसका आज तक कोई टीवी सीरियल मुकाबला नहीं कर सका इसमें काम करने वाले कलाकारों ने इतना जीवंत अभिनय किया की आज तक उन्हें महाभारत के पात्रों के नाम से पहचाना जाता है। कहा जाता है की भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना जब कहीं जाते थे तो लोग उनकी पूजा करने लगते थे और उनका आशीर्वाद लेने के लिए लोगों में होड़ लगी रहती थी।
यह सीरियल भारत की महान ऐतिहासिक घटना पर आधारित है जिसने भारत के इतिहास को एक नयी दिशा दी। यह युद्ध केवल सत्ता हासिल करने के लिए लड़ा गाया एक साधारण युद्ध नहीं था, यह सत्य और असत्य की लडाई थी, यह धर्म की लडाई थी जिसमे पांडवों का साथ देने के लिए खुद भगवान् श्री कृष्ण थे तो कौरवों के साथ देने के लिए अपने वचन में बंधे भीष्म पितामाह और कर्ण जैसे युद्धा थे। इसमें छल है, नफरत है, प्रेम है, दया है, करुना है, ममता है, वचनों का बंधन है। इसका अंत हम सबको सीख देने वाला है इसका सार यही है की हमेशा अच्छाई की बुराई पर जीत होती है। धर्मं की लड़ाई में कोई अपना है न कोई पराया, न कोई गुरु है न कोई शिष्य, न कोई बड़ा है न कोई छोटा न कोई रिश्तेदार है न कोई खानदानी। यही इस ऐतिहासिक लड़ाई का अंत है और यही श्री कृष्ण द्वारा दिया गया गीता का उपदेश।